सोमवार, 2 जनवरी 2012

जैव ईंधन


जैव ईंधन


यह प्रकाश संश्लेषण की एक प्रक्रिया है। इसके माध्यम से जैव ईंधन का उत्पादन करने के लिए पौधे सौर ऊर्जा का निर्धारण करते हैं। यह जैव ईंधन विभिन्न प्रक्रिया से गुज़रते हुए विविध ऊर्जा स्रोतों का उत्पादन करता है। उदाहरण के लिए पशुओं को चारा, जिसके बदले हमें गोबर प्राप्त होता है, कृषि अवशेष के द्वारा खाना पकाना आदि। भारत में जैव ईंधन की वर्तमान उपलब्धता लगभग 120-150 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है जो कृषि और वानिकी अवशेषों से उत्पादित है और जिसकी ऊर्जा संभाव्यता 16,000 मेगा वाट है।
उपयोग
जैव ईंधन ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसका देश के कुल ईंधन उपयोग में एक-तिहाई का योगदान है और ग्रामीण परिवारों में इसकी खपत लगभग 90 प्रतिशत है। जैव ईंधन का व्यापक उपयोग खाना बनाने और उष्णता प्राप्त करने में किया जाता है। उपयोग किये जाने वाले जैव ईंधन में शामिल है- कृषि अवशेष, लकड़ी, कोयला और सूखे गोबर।
लाभ
  • स्थानीय रूप से उपलब्ध और कुछ हद तक बहुत ज़्यादा।
  • जीवाश्म ईंधन की तुलना में यह एक स्वच्छ ईंधन है। एक प्रकार से जैव ईंधन, कार्बन डायऑक्साइड का अवशोषण कर हमारे परिवेश को भी स्वच्छ रखता है।
हानि
  • ईंधन को एकत्रित करने में कड़ी मेहनत।
  • खाना बनाते समय और घर में रोशनदानी (वेंटीलेशन) नहीं होने के कारण गोबर से बनी ईंधन वातावरण को प्रदूषित करती है जिससे स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता।
  • जैव ईंधन के लगातार और पर्याप्त रूप से उपयोग न करने के कारण वनस्पति का नुकसान होता है जिसके चलते पर्यावरण के स्तर में गिरावट आती है।
जैव ईंधन के उत्पादक प्रयोग हेतु प्रौद्योगिकी
जैव ईंधन के प्रभावी उपयोग को सुरक्षित करती प्रौद्योगिकियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहीं हैं।
ईंधन उपयोग की क्षमता निम्नलिखित कारणों से बढ़ाई जा सकती है -
  • विकसित डिज़ाइन के स्टोवों का उपयोग, जो क्षमता को दोगुणा करता है जैसे धुँआ रहित ऊर्जा चूल्हा।
  • जैव ईंधन को सम्पीड़ित/सिकोड़कर (कम्प्रेस) ब्रिकेट के रूप में बनाये रखना ताकि वह कम स्थान ले सके और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।
  • जैव वस्तुओं को एनारोबिक डायजेशन के माध्यम से बायोगैस में रूपांतरित करना जो न केवल ईंधन की आवश्यक्ताओं को पूरा करता है बल्कि खेतों को घुलनशील खाद भी उपलब्ध कराता है।
  • नियंत्रित वायु आपूर्ति के अंतर्गत जैव ईंधन के आंशिक दहन के माध्यम से उसे उत्पादक गैस में रूपांतरित करना।
जैव ईंधन
जैव ईंधन मुख्यत: सम्मिलित बायोमास से उत्पन्न होता है अथवा कृषि या खाद्य उत्पाद या खाना बनाने और वनस्पति तेलों के उत्पादन की प्रक्रिया से उत्पन्न अवशेष और औद्योगिक संसाधन के उप उत्पाद से उत्पन्न होता है। जैव ईंधन में किसी प्रकार का पेट्रोलियम पदार्थ नहीं होता है किन्तु इसे किसी भी स्तर पर पेट्रोलियम ईंधन के साथ जैव ईंधन का रूप भी दिया जा सकता है। इसका उपयोग परंपरागत निवारक उपकरण या डीजल इंजन में बिना प्रमुख संशोधनों के साथ उपयोग किया जा सकता है। जैव ईंधन का प्रयोग सरल है। यह प्राकृतिक तौर से नष्ट होने वाला सल्फर तथा गंध से पूर्णतया मुक्त है।

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