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सोमवार, 2 जनवरी 2012

जल


जल एवं भू-तापीय ऊर्जा

जल
नदी का बहता पानी और समुद्र में उत्पन्न ज्वारभाटा ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं। वर्ष 2005 के दौरान विद्युत क्षेत्र में जल ऊर्जा का योगदान 26 प्रतिशत था। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी परियोजनाओं पर भारी निवेश किए गए हैं। हाल के वर्षों में जल ऊर्जा का उपयोग कर छोटे जल विद्युत ईकाई के माध्यम से उन सुदूर गाँवों में बिजली पहुँचाई गई जो अब तक इस सुविधा से वंचित थे। देश में छोटे जल विद्युत की आकलित संभाव्यता लगभग 15 हजार मेगा वाट है। पिछले 10-12 वर्षों में, छोटे जल विद्युत परियोजनाओं की क्षमता लगभग 63 मेगा वाट से बढ़कर 240 मेगा वाट हो गई है। देश में 25 मेगा वाट तक की क्षमता वाले 420 छोटे जल विद्युत परियोजना की स्थापना की गई जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 1423 मेगा वाट थी। इसी प्रकार 187 परियोजनाएँ अभी निर्माणाधीन है जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 521 मेगा वाट है।
भू-तापीय ऊर्जा
भू-तापीय ऊर्जा का शाब्दिक अर्थ है पृथ्वी द्वारा सृजित उष्णता। प्रकृति में विद्यमान उष्ण जल स्रोत भू-तापीय ऊर्जा की उपस्थिति का सूचक है। हालांकि भारत में 300 से भी अधिक उष्ण जल स्रोत है, परंतु अभी भी इस ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करना शेष है।

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