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शनिवार, 14 जनवरी 2012

वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विधि :

    वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विधि:
  1. केंचुओं का चयन:- वर्मी कम्पोस्टिंग में केंचुओं की उन प्रजातियों का चयन किया जाता हैए जिनमें प्रजनन व वृद्वि दर तीव्र हो, प्राकृतिक तापमान के उतार चढ़ाव सहने की क्षमता हो तथा कार्बनिक पदार्थो को शीध्रता से कम्पोस्ट में परिवर्तित करने की क्षमता हो | उदाहरणतया आइसीनियाँ फीटिडा, यूडिलस, यूजेनी तथा पेरियोनिक्स एकस्केवेटस | उन्नाव जनपद के आस-पास के क्षेत्रों में आइसीनियाँ फीटिडा वर्मी कम्पोस्टिंग के लिए उपयोगी पाये गये हैं |
  2. वर्मी कम्पोस्टिंग योग्य पदार्थ:- इस प्रक्रिया के लिए समस्त प्रकार के जैव-क्षतिशील कार्बनिक पदार्थ जैसे गाय, भैस, भेड़, गधा, सुअर तथा मुर्गियों आदि का मल, बायोगैस स्लरी, शहरी कूड़ा, प्रौद्योगिक खाद्यान्न व्यर्थ पदार्थ, फसल अवशेष, घास-फूस व पत्तियाँ, रसोई घर का कचरा आदि का उपयोग किया जा सकता है |
  3. कम्पोस्टिंग:- कम्पोस्टिंग किसी भी प्रकार के पात्र जैसे मिट्टी या चीनी के बर्तन, वाश वेसिन, लकड़ी के बक्से, सीमेन्ट के टैंक इत्यादि में किया जा सकता है | गड्ढों या बेड की लम्बाई-चौड़ाई उपलब्ध स्थान के अनुसार निर्धारित करें इनकी गहराई या ऊंचाई ५0 से.मी. से अधिक न रखें | कम्पोस्टिंग के लिए सबसे नीचे की सतह ५ से.मी. मोटे कचरे (घास-फूस,केले के पत्ते, नारियल के पत्ते, फसलों के डन्ठल आदि) की तह बिछायें | इसे तह पर सड़े हुए गोबर की ५ से.मी. की तह बनायें तथा पानी छिड़क १000-१५00 केंचुए प्रति मीटर की दर से | छोड़े इसके ऊपर सड़ा गोबर और विभिन्न व्यर्थ पदार्थ जिनसे खाद बनाना चाहते (१0:३ के अनुपात में)आंशिक रूप से सड़ाने के बाद डालें तथा टाट या बोरी से ढक दें | इस पर पानी का प्रतिदिन आवश्यकतानुसार छिड़काव करें ताकि नमी का स्तर ४0 प्रतिशत से ज्यादा रहे | कम्पोस्टिंग हेतु छायादार स्थान का चुनाव करें जहाँ पानी न ठहरता हों |
  4. कम्पोस्ट एकत्रीकरण:- साधारणतया ६0 से ७0 दिन में कम्पोस्ट बन कर तैयार हों जाती है | इस अवस्था में पानी देना बन्द कर दें जिससे केंचुए नीचे चले जायें तब कम्पोस्ट को एकत्र कर, छान कर केंचुए अलग करें तथा छाया में सुखाकर प्लास्टिक की थैलियों मे भरकर सील कर दें |

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