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शनिवार, 14 जनवरी 2012

वर्मी कम्पोस्ट :

केंचुआ द्वारा जैव- विघटनाशील व्यर्थ पदार्थो के भक्षण तथा उत्सर्जन से उत्कृष्ट कोटि की कम्पास्ट (खाद) बनाने को वर्मीकम्पोस्टिंग कहतें है | वर्मी कम्पोस्ट को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही साथ फसलो की पैदावार व गुणवत्ता में भी बढ़ोत्तरी होती है | रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मृदा पर होने वाले दुष्प्रभावों का वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से सुधार होता है | इस प्रकार वर्मी कम्पोस्ट भूमि की भौतिक , रासायनिक व जैविक दशा में सुधार कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को टिकाऊ करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है |
अनुमानत: १ कि.ग्रा. भार में १000 से १५00 केंचुए होते हैं | प्राय:१ केंचुआ २ से ३ कोकून प्रति सप्ताह पैदा करता है | तत्पश्चात हर कोकून से ३-४ सप्ताह में १ से ३ केंचुए निकलते हैं | एक केंचुआ अपने जीवन में लगभग २५0 केंचुए पैदा करने की क्षमता रखता है | नवजात केंचुआ लगभग ६-८ सप्ताह पें प्रजननशील अवस्था में आ जाता है | प्रतिदिन एक केंचुआ लगभग अपने भार के बराबर मिट्टी ,खाकर कम्पोस्ट में परिवर्तित कर देता है | एक कि.ग्रा. केंचुए एक वर्ग मीटर क्षेत्र में ४५ किलोग्राम अपघटनशील पदार्थो से २५ से ३0 किग्रा. वर्मी कम्पोस्ट ६0 से ७0 दिनों में तैयार कर देते हैं |
    और अधिक जानकारियाँ
  1. वर्मी कम्पोस्ट के लाभ
  2. वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विधि
  3. वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग और सावधानियाँ

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